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Awwal Shyahi

उम्मीद से भरी आखें और खाली खाली बाज़ार

घर क्या ले जायेगा ताजिर, अहलो अयाल के लिए


सर सहला कर चुप करा रही थी मां

रो रही थी बच्ची टूटा खिलौना हाथ मे लिए


सड़क पर बैठे मिस्किन बच्चे को छोड़कर

फोन से दिये खरीदे मैंने, अपने मकान के लिए


उजाड़ा मुझे ज़हन-ओ-अक्ल ने मेरी ' परवाज़ '

ज़िंदगी के बेहतरीन फैसले मैंने नादानी मे लिए


~ ઝકવાન કુરૈશી ✍️


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ताजीर - व्यापारी, अहलो अयाल - फैमिली, मिसकिन - गरीब, जहन - दिमाग

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