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Showing posts from December, 2023

Nahi puchha

 _________________________________ #2 पहले उसके ना बुलाने पर मैंने भी उसे नहीं पूछा फिर सोचा बुला लू लेकिन रहने दिया नहीं पूछा तकबुर रखा दरमियान मैंने मेरे और उसके इसी लिए न उससे बात की न उससे कुछ पूछा ऐसे में उसने कहा कैसे हो जनाब, क्या हाल है और फिर मेरे बाद मेरे बच्चो का भी हाल पूछा फिर मुझे वो मुझसे भी भला मालूम होने लगा और मैने आखें झुका कर उसका हाल पूछा दिल मैं बुग्ज रखकर मैने बहोत बुरा किया पछताते हुए मैने मेरी अच्छाई पे खुद सवाल पूछा अखलाकी इंसान हो तो नजर आने चाहिए ' परवाज़ ' बेशुमार है दफन कब्रों में, जिसने पहले कभी नही पूछा ~ ઝકવાન કુરૈશી ✔️ __________________________________ तकबुर - अहम, बुग्ज़ - बैर, अखलाक - सज्जन

Awwal Shyahi

उम्मीद से भरी आखें और खाली खाली बाज़ार घर क्या ले जायेगा ताजिर, अहलो अयाल के लिए सर सहला कर चुप करा रही थी मां रो रही थी बच्ची टूटा खिलौना हाथ मे लिए सड़क पर बैठे मिस्किन बच्चे को छोड़कर फोन से दिये खरीदे मैंने, अपने मकान के लिए उजाड़ा मुझे ज़हन-ओ-अक्ल ने मेरी ' परवाज़ ' ज़िंदगी के बेहतरीन फैसले मैंने नादानी मे लिए ~ ઝકવાન કુરૈશી ✍️ __________________________________ ताजीर - व्यापारी, अहलो अयाल - फैमिली, मिसकिन - गरीब, जहन - दिमाग